शनिवार, 17 अप्रैल 2010

व्यापारी होता नहीं कभी किसी का मित्र

व्यापारी होता नहीं कभी किसी का मित्र
सिर्फ लाभ का ही उसे रुचे हमेशा चित्र
रुचे हमेशा चित्र जहाँ भी देखे घाटा
अपनेपन को त्याग दूर से बोले ' टा - टा '
दिव्यदृष्टि अनुभव - प्रसूत है ' राय ' हमारी
कभी किसी का मित्र नहीं होता व्यापारी
प्रतिदिन बैरी पाक की दुष्ट ठोकता पीठ
अमरीका - सा है नहीं कोई ' ताज़र ' ढीठ
कोई ' ताज़र ' ढीठ , हिन्द से प्यार जताये
लेकिन ' घाटी ' में जालिम गोले दगवाये
दिव्यदृष्टि बारूद बेचता डालर गिनगिन
दुष्ट ठोकता पीठ पाक बैरी की प्रतिदिन

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यह मैं हूं

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