अबू आजमी से किया जो ओछा व्यवहार
उसको सभ्य समाज तो करे नहीं स्वीकार
करे नहीं स्वीकार, 'बड़ा' हो बेशक गुंडा
निंदनीय है फिर भी 'घृणित' मराठी-मुंडा
दिव्यदृष्टि 'अपमानजनक' जो बोले बोली
फौरन पागल स्वान समझ कर मारो गोली
सोमवार, ९ नवम्बर २००९
बादशाह भी 'नाकाबिल' पांवों में गिरते
माया लोकल तंत्र की मित्र बड़ी मगरूर
इसके कारण हो गए 'बड़े-बड़े' मजबूर
'बड़े-बड़े' मजबूर 'हाथ' फैलाये फिरते
बादशाह भी 'नाकाबिल' पांवों में गिरते
दिव्यदृष्टि नैतिकता को नित लगता चूना
इसीलिए जम गया पुन: पाटिल का धूना
इसके कारण हो गए 'बड़े-बड़े' मजबूर
'बड़े-बड़े' मजबूर 'हाथ' फैलाये फिरते
बादशाह भी 'नाकाबिल' पांवों में गिरते
दिव्यदृष्टि नैतिकता को नित लगता चूना
इसीलिए जम गया पुन: पाटिल का धूना
रविवार, ८ नवम्बर २००९
ताज भले जाए मगर मत बनिए मोहताज
ताज भले जाए मगर मत बनिए मोहताज
वरना आए दिन बढ़े नित्य कोढ़ में खाज
नित्य कोढ़ में खाज, नाज-नखरे झेलोगे
विरोधियों के हाथ विवश होकर खेलोगे
दिव्यदृष्टि होगी छवि धूमिल चप्पा-चप्पा
कद-काठी नित घटे समझिए येदियुरप्पा
वरना आए दिन बढ़े नित्य कोढ़ में खाज
नित्य कोढ़ में खाज, नाज-नखरे झेलोगे
विरोधियों के हाथ विवश होकर खेलोगे
दिव्यदृष्टि होगी छवि धूमिल चप्पा-चप्पा
कद-काठी नित घटे समझिए येदियुरप्पा
गुरुवार, ५ नवम्बर २००९
पत्रकारिता को दिए नूतन नित्य प्रकाश
पत्रकारिता को दिए नूतन नित्य प्रकाश
कलमकार दमदार थे जोशी बड़े प्रभाष
जोशी बड़े प्रभाष, काल दे गया गवाही
हार न माने कभी लेखनी-वीर सिपाही
दिव्यदृष्टि में भी लाये जो बरबस आंसू
वह मसिजीवी ही पाये श्रद्धांजलि धांसू
कलमकार दमदार थे जोशी बड़े प्रभाष
जोशी बड़े प्रभाष, काल दे गया गवाही
हार न माने कभी लेखनी-वीर सिपाही
दिव्यदृष्टि में भी लाये जो बरबस आंसू
वह मसिजीवी ही पाये श्रद्धांजलि धांसू
बुधवार, ४ नवम्बर २००९
बोलें 'वंदे-मातरम्' पाएं 'शिव' वरदान
बोलें 'वंदे-मातरम्' पाएं 'शिव' वरदान
उद्धव ने जारी किया यह ताजा फरमान
यह ताजा फरमान डालिए फौरन आदत
बेशक तत्पश्चात खुदा की करें इबादत
देशभक्ति का दिव्यदृष्टि नूतन अफसाना
पढ़ें नहीं जो लोग ढूंढ ले पाक-ठिकाना
उद्धव ने जारी किया यह ताजा फरमान
यह ताजा फरमान डालिए फौरन आदत
बेशक तत्पश्चात खुदा की करें इबादत
देशभक्ति का दिव्यदृष्टि नूतन अफसाना
पढ़ें नहीं जो लोग ढूंढ ले पाक-ठिकाना
मंगलवार, ३ नवम्बर २००९
उसे बीनने पड़ रहे भटक-भटक कर बेर
जिस रुखसाना ने किया आतंकी को ढेर
उसे बीनने पड़ रहे भटक-भटक कर बेर
भटक-भटक कर बेर टेर दिनरात सुनाये
किंतु सुरक्षित जॉब नहीं उसको मिल पाये
दिव्यदृष्टि पीठस्थ जहां पर काहिल काजी
वहां लगाये कौन मित्र प्राणों की बाजी?
उसे बीनने पड़ रहे भटक-भटक कर बेर
भटक-भटक कर बेर टेर दिनरात सुनाये
किंतु सुरक्षित जॉब नहीं उसको मिल पाये
दिव्यदृष्टि पीठस्थ जहां पर काहिल काजी
वहां लगाये कौन मित्र प्राणों की बाजी?
क्रूर कैबिनेट कंचुकी कामयाब कहलाय
पी जाए जो माह में पांच लाख की चाय
क्रूर कैबिनेट कंचुकी कामयाब कहलाय
कामयाब कहलाय, किए बिन कोई देरी
चाहो अगर 'प्रमाण' पहुंच लो पुड्डूचेरी
दिव्यदृष्टि धिक्कार खूब पब्लिक से पाए
पांच लाख की चाय माह में जो पी जाए
क्रूर कैबिनेट कंचुकी कामयाब कहलाय
कामयाब कहलाय, किए बिन कोई देरी
चाहो अगर 'प्रमाण' पहुंच लो पुड्डूचेरी
दिव्यदृष्टि धिक्कार खूब पब्लिक से पाए
पांच लाख की चाय माह में जो पी जाए
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