मंगलवार, 30 सितंबर 2008

गली गली गुजरात में विफल हुए जासूस

दिल्ली में दहशत बढ़ी महाराष्ट्र मायूस
गली गली गुजरात में विफल हुए जासूस
विफल हुए जासूस ठनकता माथा ठाणे
मरघट माले गांव लगे निर्दोष ठिकाने
दिव्यदृष्टि जो उग्रवाद की लिखें कहानी
धीरज धरकर उन्हें याद करवा दें नानी

गली गली गुजरात में विफल हुए जासूस

दिल्ली में दहशत बढ़ी महाराष्ट्र मायूस
गली गली गुजरात में विफल हुए जासूस
विफल हुए जासूस ठनकता माथा ठाणे
मरघट माले गांव लगे निर्दोष ठिकाने
दिव्यदृष्टि जो उग्रवाद की लिखें कहानी
धीरज धरकर उन्हें याद करवा दें नानी

सोमवार, 29 सितंबर 2008

वफा की आप गर उम्मीद करते हैं करीना से ,

सजा बाजार है फिल्मी किए कसरत नहीं घूमो
हसीनों से मुहब्बत की लिए हसरत नहीं घूमो
अभी बाजाब्ता बेगम नहीं वह आपकी सैफू
के नशे में तुम जरा हजरत नहीं झूमो
वफा की आप गर उम्मीद करते हैं करीना से ,
न वो चूमे किसी को और तुम हरगिज नहीं चूमो

रविवार, 28 सितंबर 2008

मियां बुखारी लीजिए जरा अक्ल से काम

मियां बुखारी लीजिए जरा अक्ल से काम
नहीं पुलिस को कीजिए बेमतलब बदनाम
बेमतलब बदनाम , जान पर जो दल खेला
चला रहे क्यों आप बेवजह उस पर ढेला
दिव्यदृष्टि गुमराहों से मत करिए यारी
जरा अक्ल से काम लीजिए मियां बुखारी

गुरुवार, 25 सितंबर 2008

हे बेटा अमिताभ कर्म करना तुम अच्छन

लीक-लीक गाड़ी चले लीकहिं चलें कपूत
लीक बिना तीनहिं चलें शायर , सिंह , सपूत
शायर , सिंह , सपूत , कह गए बाबा बच्चन
हे बेटा अमिताभ कर्म करना तुम अच्छन
दिव्यदृष्टि प्यारे जब तक संघर्ष करोगे
तब तक अगली पीढ़ी में आदर्श भरोगे

टाटा ने सिंगूर से बिस्तर लिया समेट

टाटा ने सिंगूर से बिस्तर लिया समेट
ममता बैनर्जी करें अब खेती भरपेट
अब खेती भरपेट , सियासी पौध उगाएं
घर आए तृणमूल उसी को बेशक खाएं
दिव्यदृष्टि सूबे में हो चहुंदिशि कंगाली
यही सोच कर हाथ मले बुद्धा बंगाली

बुधवार, 24 सितंबर 2008

राहुल बाबा शौक से करिए आप विवाह

राहुल बाबा शौक से करिए आप विवाह
बहू मगर वह लाइए जिसकी मन में चाह
जिसकी मन में चाह, सोनियाजी को भाए
मन में प्रेम अथाह लिए वह घर में आए
दिव्यदृष्टि दिखलाए अपनापन हमजोली
पाए सबका स्नेह बोल कर हिन्दी बोली।

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

हो परमाणु करार तो बढ़े आय की डोर

अमरीकी ताजर बहुत लगा रहे हैं जोर
हो परमाणु करार तो बढ़े आय की डोर
बढ़े आय की डोर, दूर भागे बेकारी
वर्कर ढाई लाख नौकरी पाएं भारी
दिव्यदृष्टि भाए भारत की उनको गाजर
लगा रहे हैं जोर बहुत अमरीकी ताजर

सोमवार, 22 सितंबर 2008

गिनने में मशगूल थे हत्यारे उत अंक

झेल रहे थे लोग इत उग्रवाद का डंक
गिनने में मशगूल थे हत्यारे उत अंक
हत्यारे उत अंक, प्रशंसा पाने खातिर
मासूमों की जान ले रहे सारे शातिर
दिव्यदृष्टि भर चुका सब्र का अब पैमाना
बहुत जरूरी है दुष्टों को सबक सिखाना

रविवार, 21 सितंबर 2008

धन्य ज़िंदगी हुई वीरगति बेशक पाए

दिखी पुलिस की वीरता हुए जंगजू ढेर
देशद्रोहियों के बिके दो घंटे में बेर
दो घंटे में बेर, शेर शर्मा बन आए
धन्य ज़िंदगी हुई वीरगति बेशक पाए
दिव्यदृष्टि जो जान लुटाने को हो आतुर
करते लोग सलाम उसे शाबाश बहादुर !

निकल पड़े मनमोहन करने मरहमपट्टी

नए सख्त कानून की नहीं ज़रूरत आज
पहले से उपलब्ध जो , चले उसी से काज
चले उसी से काज , राज पुरजोर करेंगे
दिखे जो सुराख , उसी को जल्द भरेंगे
दिव्यदृष्टि हो पुलिस व्यस्था हट्टीकट्टी
निकल पड़े मनमोहन करने मरहमपट्टी

जो दे अहम सुराग भला हो उसका अल्लाह

धरे न अतिवादी गए पीटे पुलिस लकीर
भटक रही है दरबदर जैसे फिरे फकीर
जैसे फिरे फकीर भीख की आस लगाए
मांगे सबकी खैर दुआ का हाथ उठाए
दिव्यदृष्टि डडवाल करें वो हरकत लल्ला
जो दे अहम सुराग भला हो उसका अल्ला



सारा दिन बदले मगर गृहमंत्री पोशाक

घूम घूमकर जंगजू करते सीना चाक
सारा दिन बदले मगर गृहमंत्री पोशाक
गृहमंत्री पोशाक धाक उनकी है आला
नाहक समझें लोग उन्हें घर का रखवाला
दिव्यदृष्टि जिसके हो ऐसे शौक नवाबी
खाक उठाए सख्त कदम वो शख्स जवाबी

पाटिल के सिर पर गिरी लाठी लालू छाप

पाटिल के सिर पर गिरी लाठी लालू छाप
ऐसे काहिल शख्स को झेल रहीं क्यों आप
झेल रहीं क्यों आप सोनिया जी समझाएं
बैठे हैं बेकार मुलायम बंधु बुलाएं
दिव्यदृष्टि यदि लगे न माफिक उनका चेहरा
किसी बिहारी को दें गृहमंत्री का सेहरा

फिर भी अब डडवाल बने फिरते हैं हीरो

दो दर्जन से अधिक को गए सिरफिरे मार
पुलिस देखती रह गई, हाथ मले सरकार
हाथ मले सरकार, चौकसी निकली जीरो
फिर भी अब डडवाल बने फिरते हैं हीरो
दृव्यदृष्टि डिप्लोमसी का देख छलावा पुख्ता
मिले सुराग, पुलिस करती है दावा

भारत दौरे पर नहीं आएगा सयमंड

भारत दौरे पर नहीं आएगा सयमंड
लगे फड़कने खबर से भज्जी के भुजदंड
भज्जी के भुजदंड, खोपड़ी उनकी ठनकी
हुआ क्रिकेट से दूर, खिलाड़ी शातिर सनकी
दिव्यदृष्टि यह काम, किए कंगारु चंगा
वरना मंकी से होता दोबारा पंगा।

गुरुवार, 11 सितंबर 2008

किंतु दौड़ में सचिन रह गए पीछे छूटे

वन डे में धोनी जमे ट्वंटी में युवराज
आईसीसी ने रखा दोनों के सिर ताज
दोनों के सिर ताज , प्रशंसा भारी लूटे
किंतु दौड़ में सचिन रह गए पीछे छूटे
दिव्यदृष्टि मायूस न होना ' नन्हें ' भाई
चलो चलें दे दें दोनों को खूब बधाई

बुधवार, 10 सितंबर 2008

यहीं मिली पहचान, बोलते बच्चन सादर

दिया मुंबई ने मुझे शोहरत , इज्जत मान
कलाकार के रूप में यहीं मिली पहचान
यहीं मिली पहचान , बोलते बच्चन सादर
फिर मेरा परिवार करे क्यों भला निरादर
दिव्यदृष्टि यह राज समझ लें लोग मराठी
उनके आगे तुच्छ यहां मेरी कद-काठी

मंगलवार, 9 सितंबर 2008

हेम-आरुषि के कातिल घूमें बेखटके

हत्यारा बैठा हुआ छिपा कौन सी खोह
सीबीआई अभी भी लगा न पाई टोह
लगा न पाई टोह , अंधेरे में नित भटके
हेम-आरुषि के कातिल घूमें बेखटके
दिव्यदृष्टि आंखों के आगे घिरा अंधेरा
और समय का राग इसलिए उसने टेरा
तीन महीने में नहीं उसको मिला सबूत
नालायक साबित हुए सारे खोजी पूत
सारे खोजी पूत , जिन्हें माने थे
कातिल छूट गए हैं सभी जमानत करके हासिल
दिव्यदृष्टि कर रहे जांच की जो अगुवाई
' खोज रत्न ' से करो उन्हें सम्मानित भाई

सोमवार, 8 सितंबर 2008

गुमसुम बैठे गांगुली दीख रहे नाराज

गुमसुम बैठे गांगुली दीख रहे नाराज
खस्ताहाली देखकर दुखी हुए युवराज
दुखी हुए युवराज , टीम से होकर बाहर
किए वापसी कैफ फिरें मस्ती में नाहर
दिव्यदृष्टि चाहे जो भी जीते ' ईरानी '
दादा के घर मगर रहे छाई वीरानी

शनिवार, 6 सितंबर 2008

गंजे को मिल ही गया है आखिर नाखून

गंजे को मिल ही गया है आखिर नाखून
फूला-फूला फिर रहा बनकर अफलातून
बनकर अफलातून, साथ 'दादा' के बैठे
पावरफुल जो लोग कौन फिर उनसे ऐंठे
दिव्यदृष्टि जो शक्ति शेखचिल्ली ने पाई
उसकी खातिर उसे दीजिए कोटि बधाई

नीयत पाकिस्तान की दीख रही नापाक

पब्लिक रैली में बहुत बोले साफ बराक
नीयत पाकिस्तान की दीख रही नापाक
दीख रही नापाक, मदद जो पाई भारी
उससे ही कर रहा जंग की फिर तैयारी
दिव्यदृष्टि इस बार अगर लेगा वह पंगा
हिन्दुस्तानी फौज सबक सिखलाए चंगा।

शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

गुठली की तरह हो रहा है आम आदमी

हालत पे अपनी रो रहा है आम आदमी
पहचान अपनी खो रहा है आम आदमी
आकाश की छत सर पे ज़मीं का है बिछोना
फुटपाथ पे नित सो रहा है आम आदमी
सरकार बेहतरी का रोज़ करती है दावा
दावों का बोझ ढो रहा है आम आदमी
शासन की शिलाजीत दिव्यदृष्टि बेअसर
गुठली की तरह हो रहा है आम आदमी

ऐसे कातिल को महज़ पांच साल की जेल

जिसने खेला सड़क पर क्रूर मौत का खेल
ऐसे कातिल को महज़ पांच साल की जेल
पांच साल की जेल, नहीं है कतई वाजिब
सख्त करो कानून मौत का मित्र मुनासिब
दारू पीकर जो चालक लोगों को मारे
उस हत्यारे को फांसी दो फौरन प्यारे

यहां-वहां पर बेवजह नहीं भटकिए राज

यहां-वहां पर बेवजह नहीं भटकिए राज
खामोशी से बैठ कर घर में करिए काज
घर में करिए काज , नसीहत मेरी मानें
वरना धर कर पुलिस तुम्हें ले जाए थाने
दिव्यदृष्टि अब चुप्पी साधो एक महीना
दूर रहे हर बला न आए तनिक पसीना

बुधवार, 3 सितंबर 2008

पड़े न महंगा कहीं ऊर्जा का यह झटका

ले परमाणु करार की मन में भारी चाह
मनमोहन ने देश को किया खूब गुमराह
किया खूब गुमराह, झूठ संसद में बोले
जिसकी कलई स्वयं पत्र अमरीकी खोले
दिव्यदृष्टि यदि भारत कोई 'टेस्ट' करेगा
उसी समय समझौता अपनी मौत मरेगा
ईंधन की आपूर्ति में भारत को सहयोग
बिना शर्त कतई नहीं इसे समझ लें लोग
इसे समझ लें लोग, कहे अमरीकी शासन
मिले नहीं तकनीक न होगा शोधित राशन
दिव्यदृष्टि यदि करे इंडिया हेराफेरी
होगा रद्द करार किए बिन कोई देरी
बिजली का संकट बता मनमोहन सरकार
चली बेचने देश को कर परमाणु करार
कर परमाणु करार, कह रहे लोग सयाने
फिर भी उनकी बात न बुद्धू मुखिया माने
चले हंस की चाल जगत में जो भी कागा
कहलाए मतिमंद चतुर्दिक वही अभागा
जिसका ईंधन ही नहीं उसका चूल्हा आप
निकले भला खरीदने क्यों कर माई-बाप
क्यों कर माई-बाप, देश को साफ बताएं
किन शर्तों पर मिले जरा यह भी समझाएं
दिव्यदृष्टि दिन-रात सताए हमको खटका
पड़े न महंगा कहीं ऊर्जा का यह झटका

सिर पर दारू का नशा पांवों में थी कार

सिर पर दारू का नशा पांवों में थी कार
यारों की टोली हुई उस पर तभी सवार
उस पर तभी सवार बढ़ी रफ्तार अचानक
मदहोशी में हुआ हादसा सड़क भयानक
दिव्यदृष्टि है क्षम्य नहीं वह लापरवाही
तीन नागरिक सहित मर गए तीन सिपाही
घायल होकर रोड पर तड़प रहे थे लोग
हुआ न दुष्टों को जरा फिर भी कोई सोग
फिर भी कोई सोग, साथ जो यार सयाने
जालिम फौरन लगे वहां से तथ्य मिटाने
हुआ न मक्कारों को कोई भी पछतावा
मानवता मर गई मिटा ममता का दावा
केस अदालत में चला जब पूरे नौ साल
तब जाकर कानून की गल पाई है दाल
गल पाई है दाल बोलते मुंसिफ आकिल
है रईसजादा दोषी छह-छह का कातिल
दिव्यदृष्टि है नहीं रहम के काबिल बंदा
नशा हुआ काफूर बहुत पछताए नंदा

मंगलवार, 2 सितंबर 2008

त्यों ही ममता के हुए तेवर फौरन नर्म

राज्यपाल गांधी पड़े ज्यों ही थोड़ा गर्म
त्यों ही ममता के हुए तेवर फौरन नर्म
तेवर फौरन नर्म, पसीना माथे आया
चली सियासी दांव देख बुद्धा की माया
दिव्यदृष्टि बिसरा कर सारी तुनुकमिजाज़ी
बातचीत के लिए हुईं टाटा से राज़ी।

यह मैं हूं

यह मैं हूं

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