मंगलवार, 9 सितंबर 2008

हेम-आरुषि के कातिल घूमें बेखटके

हत्यारा बैठा हुआ छिपा कौन सी खोह
सीबीआई अभी भी लगा न पाई टोह
लगा न पाई टोह , अंधेरे में नित भटके
हेम-आरुषि के कातिल घूमें बेखटके
दिव्यदृष्टि आंखों के आगे घिरा अंधेरा
और समय का राग इसलिए उसने टेरा
तीन महीने में नहीं उसको मिला सबूत
नालायक साबित हुए सारे खोजी पूत
सारे खोजी पूत , जिन्हें माने थे
कातिल छूट गए हैं सभी जमानत करके हासिल
दिव्यदृष्टि कर रहे जांच की जो अगुवाई
' खोज रत्न ' से करो उन्हें सम्मानित भाई

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सटीक..



अफसोसजनक स्थितियाँ.

दिव्यदृष्टि ने कहा…

धन्यवाद...

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