शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

सकते में है आजकल शीला की सरकार

सकते में है आजकल शीला की सरकार
खूब लगाई कोर्ट ने जम करके फटकार
जम करके फटकार जरा मानवता सीखो
नहीं 'याचकों' के ऊपर बेमतलब चीखो
दिव्यदृष्टि वरना 'भिक्षालय' ढह जायेगा
'राज' और तुममें क्या अंतर रह जायेगा?

गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

असंतुष्ट हैं फिर भी 'उनके' साथ रहेंगे

सीएम बनने के लिए मिला उन्हें प्रस्ताव
दिए नहीं कतई मगर विरोधियों को भाव
विरोधियों को भाव, ताव मन में है भारी
लेकिन करें अजीत नहीं हरगिज 'गद्दारी'
दिव्यदृष्टि चाचा से दिल की बात कहेंगे
असंतुष्ट हैं फिर भी 'उनके' साथ रहेंगे

बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

हाकिम है बेदर्द सुना मत करुण कहानी

शीला का दामन हुआ 'पावर' से लबरेज
अत: फैसले कर रहीं निठुर सनसनीखेज
निठुर सनसनीखेज, बढ़ाकर मोटर भाड़ा
मुसाफिरों का महंगाई में किया कबाड़ा
दिव्यदृष्टि हर हाल पड़े पॉकिट कटवानी
हाकिम है बेदर्द सुना मत करुण कहानी

शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

पांच साल अब और नहीं बन पाये दाढ़ी

बाला साहब आजकल दीख रहे बेहाल
नहीं चुनावों में गली शिवसेना की दाल
शिवसेना की दाल, मराठी मानुष खंजर
गया पीठ में भोंक 'दर्द' हो रहा भयंकर
दिव्यदृष्टि हो गई व्यर्थ सब 'सेवा' गाढ़ी
पांच साल अब और नहीं बन पाये दाढ़ी

शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2009

चौटाला चलने लगे चतुर सियासी चाल

भूपिंदर का परख कर हरियाणा में हाल
चौटाला चलने लगे चतुर सियासी चाल
चतुर सियासी चाल दीखती बेशक टेढ़ी
राज्यपाल की किंतु चूम आये वे ड्योढ़ी
दिव्यदृष्टि पड़ सकता है भारी यह पट्ठा
बिखर न जाये मित्र कहीं हुड्डा का मट्ठा

गुरुवार, 22 अक्तूबर 2009

फिर सत्ता से दूर रहे चोटिल चौटाला

कामयाब फिर से रहा हरियाणे में हाथ
भूपिन्दर हुड्डा फिरें करके ऊंचा माथ
करके ऊंचा माथ, साथ मतदाता आये
चहक उठी चौपाल चौधरीजी मुस्काये
दिव्यदृष्टि देवीसुत के घर लटका ताला
फिर सत्ता से दूर रहे चोटिल चौटाला

लूट भतीजा गया खूब चाचा की खोली

बोले उद्धव ठाकरे अति बड़बोले बोल
महाराष्ट्र में खुल गई शिवसेना की पोल
शिवसेना की पोल रह गई खाली झोली
लूट भतीजा गया खूब चाचा की खोली
दिव्यदृष्टि चव्हाण शरद के चेहरे चमके
रही सलामत 'कुर्सी' नाचें-गाएं जमके

बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

नहीं चिरौरी का प्यारे अब रहा जमाना

भुज बल से ही जीतते आये योद्धा जंग
भुज बल से ही गगन में ऊंची उड़े पतंग
ऊंची उड़े पतंग, छगन को मगन कराये
शोकाकुल चह्वाण देशमुख फिरें डराये
दिव्यदृष्टि भुज बल से ही है सत्ता पाना
नहीं चिरौरी का प्यारे अब रहा जमाना

सोमवार, 19 अक्तूबर 2009

कोई पूछे तो खुद को सेकुलर बतलाओ

अमरीका जाना अगर तुमको शाहनवाज
फौरन जुदा हुसैन से हो जाओ तुम आज
हो जाओ तुम आज नहीं निष्ठा जतलाओ
कोई पूछे तो खुद को सेकुलर बतलाओ
दिव्यदृष्टि जब तक सत्ता में जीजी-जीजा
'हाथ' दिखायेगा प्यारे अमरीकी 'वीजा'

गुरुवार, 15 अक्तूबर 2009

आइए दीपावली पर हम जलाएं वह ' दिया '

चल रही है हर तरफ फिरकापरस्ती की हवा ,
बढ़ रहा हर शख्स में नित दायरा संदेह का।
खत्म होती जा रही - इन्सानियत की उर्वरा ,
चढ़ रहा उस पर निरंतर आवरण इक रेह का।
पूछ कर देखा अदीबों - आलिमों से खूब ही ,
पर , नहीं उत्तर मिला मित्रो सियासी ठेह का।
आइए दीपावली पर हम जलाएं वह ' दिया '
दिव्यदृष्टि जो करे पावन उजाला ' नेह ' का।

बुधवार, 14 अक्तूबर 2009

तभी लोकप्रिय होते जस्टिस गुंडा स्वामी

जर्जर नित इन्साफ की होती गई मशीन
उसके ऊपर से अत: घटता गया यकीन
घटता गया यकीन उम्र आधी कट जाए
मगर नहीं इन्सान न्याय हासिल कर पाए
दिव्यदृष्टि बढ़ती जाये जुडिशल नाकामी
तभी लोकप्रिय होते जस्टिस गुंडा स्वामी

मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

'सरेआम' क्यों भिजवाई ठर्रे की बोतल

बेशक भेजे माल्या 'प्रेम' सहित उपहार
किन्तु भाजपा सांसद करें नहीं स्वीकार
करें नहीं स्वीकार संस्कृति भिन्न बताते
इसीलिए लेटर लिख कर वे रोष जताते
दिव्यदृष्टि है निंदनीय यह हरकत टोटल
'सरेआम' क्यों भिजवाई ठर्रे की बोतल

सोमवार, 12 अक्तूबर 2009

झटपट एक करोड़ 'रंगदारी' भिजवाओ

'ज़िंदा' लोगों में अगर होना तुम्हें शुमार
मानो उनकी मांग को तुम नीतीश कुमार
तुम नीतीश कुमार, न कतई देर लगाओ
झटपट एक करोड़ 'रंगदारी' भिजवाओ
दिव्यदृष्टि धमकी देता फिर रहा 'दरिंदा'
होना तुम्हें शुमार अगर लोगों में 'जिंदा'

रविवार, 11 अक्तूबर 2009

उन्हें भला शिक्षा से क्या है लेना-देना

माया लोकल तंत्र की भारत में मशहूर
जिसमें भ्रष्टाचार नित पनप रहा भरपूर
पनप रहा भरपूर, माल सरकारी खाते
फिर भी ब्यूरोक्रैट बिचारे नहीं अघाते
दिव्यदृष्टि नेता गण चाबें वोट-चबेना
उन्हें भला शिक्षा से क्या है लेना-देना
हंसों को झूठा चना, मोती चुनते काग
लक्ष्मीवाहन जीमते कोयल वाला भाग
कोयल वाला भाग भैरवी गिद्ध गा रहे
सारे बगुला भगत प्रशंसा नित्य पा रहे
दिव्यदृष्टि हो जहां सियारों की प्रभुताई
वहां सिंह सम्मान किस तरह पाए भाई

सुलगे अगर समाज में असंतोष की आग

सुलगे अगर समाज में असंतोष की आग
तो यह निश्चित जानिए शासन में है दाग
शासन में है 'दाग' नीति-नीयत है खोटी
भूखों मरें 'मजूर' उड़ायें 'शोषक' बोटी
नहीं दीखता दिव्यदृष्टि जब कोई 'चारा'
मजबूरी में तभी 'व्यक्ति' बनता हत्यारा
कहने को तो 'डॉक्टर' चला रहे सरकार
किन्तु नक्सली रोग का पता नहीं उपचार
पता नहीं उपचार रोज चलती क्यों गोली
बोल रहे क्यों लोग बगावत वाली बोली
दिव्यदृष्टि इसलिए जल्द लक्षण पहचानो
बेशक उसके बाद 'आपरेशन' की ठानो

गुरुवार, 8 अक्तूबर 2009

फिर भी वेंकटरमन कोटिश: तुम्हें बधाई

घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध
सदियों से साबित किए यही कहावत गिद्ध
यही कहावत गिद्ध, निरन्तर जारी गायन
इसीलिए भारत से 'प्रतिभा' करे पलायन
दिव्यदृष्टि है अकथनीय यह 'पीड़ा' भाई
फिर भी वेंकटरमन कोटिश: तुम्हें बधाई

बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

बन कर 'भागीदार' समस्या दर्ज कराएं

दिल्ली वालों से करें शीला नेक अपील
फौरन फोन घुमाइए अगर बैड हो फील
अगर बैड हो फील, राह में दीखे गड्ढा
या हो गंदा पार्क बना कचरे का अड्डा
दिव्यदृष्टि सुन्दर शहरी का फर्ज निभाएं
बन कर 'भागीदार' समस्या दर्ज कराएं
दीखे पहली नजर में उत्तम बहुत विचार
इसीलिए तो कर रहा शासन खूब प्रचार
शासन खूब प्रचार, हेल्पलाइन बनवाये
जगह-जगह विज्ञापन में नम्बर छपवाये
दिव्यदृष्टि यह किन्तु बतायें शीला अंटी
कौन लगाएगा नौकरशाही को संटी।

मंगलवार, 6 अक्तूबर 2009

जनप्रतिनिधि गिरेबान में अपने झांकें

भिन्न-भिन्न व्यापार में विशेषज्ञ जो लोग
वही कर रहे ज्ञान का जनहित में उपयोग
जनहित में उपयोग, रात-दिन सेवा करते
तब उसके बदले में श्रम का 'मेवा' चरते
दिव्यदृष्टि जो लोग 'कमाई' उनकी आंकें
वे 'जनप्रतिनिधि' गिरेबान में अपने झांकें

सोमवार, 5 अक्तूबर 2009

उसे राज की फिक्र सताती है डेनाइट

छत्रपती के नाम पर झूठा रोज प्रचार
महाराष्ट्र में कर रही कांग्रेस सरकार
कांग्रेस सरकार, पयोनिधि मूरत थापे
समाचार सुन क्रुद्ध ठाकरे सूरत कांपे
दिव्यदृष्टि सेना की दीखे हालत टाइट
उसे राज की फिक्र सताती है डेनाइट

शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

कांग्रेस छलका रही दलित-प्रेम का जाम

कांग्रेस छलका रही दलित-प्रेम का जाम
शबरी-आश्रम में अतः पहुंच गये श्रीराम
पहुंच गए श्रीराम, नाम 'बापू' का लेकर
श्रवण समस्या किए सांत्वना भारी देकर
दिव्यदृष्टि यदि राजभवन सुख चाहें माता
तो बस यही उपायः तजें 'माया' से नाता

गुरुवार, 1 अक्तूबर 2009

ले बापू का नाम गोल्डन कलम खरीदो

गांधी को जब बेचते रोज सियासतदान
तब तो उफ करता नहीं नेता एक महान
नेता एक महान, साथ ही फिल्म सितारे
करते 'गांधीगीरी' सिर्फ शोहरत के मारे
दिव्यदृष्टि इसलिए तजो कोहराम मुरीदो
ले बापू का नाम गोल्डन कलम खरीदो

यह मैं हूं

यह मैं हूं

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