रविवार, 11 अक्तूबर 2009

सुलगे अगर समाज में असंतोष की आग

सुलगे अगर समाज में असंतोष की आग
तो यह निश्चित जानिए शासन में है दाग
शासन में है 'दाग' नीति-नीयत है खोटी
भूखों मरें 'मजूर' उड़ायें 'शोषक' बोटी
नहीं दीखता दिव्यदृष्टि जब कोई 'चारा'
मजबूरी में तभी 'व्यक्ति' बनता हत्यारा
कहने को तो 'डॉक्टर' चला रहे सरकार
किन्तु नक्सली रोग का पता नहीं उपचार
पता नहीं उपचार रोज चलती क्यों गोली
बोल रहे क्यों लोग बगावत वाली बोली
दिव्यदृष्टि इसलिए जल्द लक्षण पहचानो
बेशक उसके बाद 'आपरेशन' की ठानो

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