बुधवार, 23 दिसंबर 2009

नहीं किसी की भी गली झारखंड में दाल

सभी दलों की खींच दी मतदाता ने खाल
नहीं किसी की भी गली झारखंड में दाल
झारखंड में दाल भात भी बिखरा जमकर
ताक रहे इक-दूजे का मुंह लीडर थमकर
दिव्यदृष्टि अब जो दे जितनी ऊंची 'बोली'
मिले उसी को खीर सजे सत्ता की डोली

1 टिप्पणी:

सुभाष चन्द्र ने कहा…

sahi kaha aapne.... sayad Jharkhand ki niyati v aisi hi hai

यह मैं हूं

यह मैं हूं