मंगलवार, 29 दिसंबर 2009

दिल्ली आना है अगर दीजे एंट्री फीस

शीला अंटी बोलतीं साफ निपोरे खीस
दिल्ली आना है अगर दीजे एंट्री फीस
दीजे एंट्री फीस, रोज पॉकेट कटवाएं
बढ़ा कमाई नित्य प्रदूषण भी घटवाएं
दिव्यदृष्टि चिंतातुर दीखें बबली-बंटी
साफ निपोरे खीस बोलतीं शीला अंटी

2 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

वाह वाह बहुत खूब

Udan Tashtari ने कहा…

सही!!


मुझसे किसी ने पूछा
तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
तुम्हें क्या मिलता है..
मैंने हंस कर कहा:
देना लेना तो व्यापार है..
जो देकर कुछ न मांगे
वो ही तो प्यार हैं.


नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

यह मैं हूं

यह मैं हूं