शुक्रवार, 7 मई 2010

सुन कर फांसी की सजा गया कसाई कांप

सुन कर फांसी की सजा गया कसाई कांप
फंसा न्याय के जाल में दुष्ट 'लश्करी' सांप
दुष्ट 'लश्करी' सांप, बैठ कर बिल में सोचे
देख 'मृत्यु' सन्निकट विषैली केंचुल नोचे
दिव्यदृष्टि दर्जनों डस गया जालिम चुन कर
गया कसाई कांप सजा फांसी की सुन कर

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

भाई जी, वो भी जानता है कि कुछ होना जाना नहीं है. वो भला क्या कांपेगा सजा सुन कर.

यह मैं हूं

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