शुक्रवार, 21 मई 2010

मन्नू भाई जब तलक चला रहे सरकार

मन्नू भाई जब तलक चला रहे सरकार
नहीं थमेगी तब तलक महंगाई की मार
महंगाई की मार, प्राण पब्लिक के छूटें
प्रणव मुखर्जी किन्तु हाथ से दोनों लूटें
जमाखोर की दिव्यदृष्टि नित बढ़े कमाई
चला रहे सरकार जब तलक मन्नू भाई

1 टिप्पणी:

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

सटीक व्यंग्य!!

यह मैं हूं

यह मैं हूं

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