गुरुवार, 27 मई 2010

खूब चली बेशर्म पर अदालती बंदूक

सजा बढ़ी राठौर की बंद हो गई हूक
खूब चली बेशर्म पर अदालती बंदूक
अदालती बंदूक चूक प्रत्यक्ष सुधारी
पूरी किया वसूल रही जो शेष उधारी
दिव्यदृष्टि जो काम करे नामर्दी वाला
बेइज्जत हो इसी तरह वह वर्दी वाला

1 टिप्पणी:

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत खूब जी बहुत बढिया ।तीर निशाने पर है

यह मैं हूं

यह मैं हूं

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