अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीक
केवल अपने कथ्य ही मानें हरदम ठीक
मानें हरदम ठीक, नजरिया निजी अनूठा
'साथी' जो कुछ कहें उसे बतलाएं झूठा
दिव्यदृष्टि इसलिए 'सही' अवसर बोलेंगे
एंडरसन के 'अतिथि' भेद सगरे खोलेंगे
शुक्रवार, 11 जून 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
ब्लॉग आर्काइव
-
▼
2010
(86)
-
▼
June
(12)
- तत्व प्रज्वनशील तुरत गडकरी हटाएं
- कब तक रहे कुंवारा मैया तेरा पुत्तर
- मोदी जी ले जाइये वापस पांच करोड़
- माना जाता अतिथि को भारत में भगवान
- रोये बेबस बाप देख नयनों का फूला
- अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीक
- भारत में आतंक का हामी पाकिस्तान
- पुलिस तक्षकों में बढ़ा काम वासना रोग
- तुलसी बाबा कह गए दोषी नहीं समर्थ
- निगल हजारों जिन्दगी गैस गई भोपाल
- बेमतलब अखबार उन्हें संलिप्त बताएं
- लालमहल को रौंद कर विहँस रहा तृणमूल
-
►
May
(21)
- दिया सड़क पर मौत का नारी को उपहार
- झुकता उनके कृत्य से मानवता का भाल
- कायम करो 'मिसाल' उतारें लोग आरती
- कालकोठरी में ताई अब मुझे न रहना
- खूब चली बेशर्म पर अदालती बंदूक
- किसी तरह बेगम उसको हासिल हो जाए
- चल गांधी की राह बदन पर लगा लंगोटी
- मन्नू भाई जब तलक चला रहे सरकार
- लगा राम की मूर्ति बनें पॉलिटिकल पंडा
- फांसी की फाइल रहीं शीला बैठी दाब
- भगदड़ में जाये भले मुसाफिरों की जान
- केश कटाकर मंदिरा किया न चंगा काम
- ज्यादा भोजन से सदा होता है अतिसार
- चूहे को यदि गडकरी बतलायेंगे स्वान
- किंतु कागजी शेर ढेर हो ताकें अंबर
- सोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलें
- सोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलें
- जोड़-तोड़ से सब 'सरकारी माल' पचाओ
- सुन कर फांसी की सजा गया कसाई कांप
- ट्रेनिंग सेंटर टेरर का बना हुआ है पाक
- दुखी मुसाफिर फिर रहे बेचारे-बेचैन
-
►
March
(17)
- करें केंद्र से वार्ता छोड़ 'घमंडी' चीख
- जबसे जनप्रतिनिधि बने दुष्ट, उठाईगीर
- चौथेपन में 'खेल' खेलती बुढ़िया माई
- कांग्रेस की आंख का तारा थे अमिताभ
- भूल गये 'औकात' वर्करों को लतियाये
- मुद्रा की माला पहन माया परम प्रसन्न
- राजनीति की चर गए हाथी सारी घास
- मगर 'फायदेमंद' अब लगते नहीं कलाम
- दंगों का गुजरात के करिये पहले जिक्र
- खवातीन पर सख्त रवैया लेता नदवा
- पाकिस्तानी क्रिकेट के प्लेयर बेईमान
-
▼
June
(12)

2 टिप्पणियाँ:
आईये पढें ... अमृत वाणी !
badhiya...sateek vyang
एक टिप्पणी भेजें