गुरुवार, 24 जुलाई 2008

रुष्ट माकपा ने लिया सोमनाथ को लूट

नहीं बुढ़ापे में मिली कतई उनको छूट
रुष्ट माकपा ने लिया सोमनाथ को लूट
सोमनाथ को लूट, हथौड़ा मारे जालिम
बुद्धि हो गई भ्रष्ट मगर कहलाते आलिम
दिव्यदृष्टि जो भद्र पुरुष को मारे हंसिया
लोग करेंगे खड़ी उसी की फौरन खटिया

1 टिप्पणी:

शोभा ने कहा…

बहुत खूब लिखा है।

यह मैं हूं

यह मैं हूं

ब्लॉग आर्काइव