शुक्रवार, 8 अगस्त 2008

फिर भी लंका में नहीं छोड़ सके हैं छाप

पांच पारियां टेस्ट की खेल चुके हैं आप
फिर भी लंका में नहीं छोड़ सके हैं छाप
छोड़ सके हैं छाप , हो रहे लल्लू साबित
सकते में हैं सचिन प्रशंसक तेरे अगणित
दिव्यदृष्टि इस तरह नहीं उनका दिल तोड़ो
लिखकर लंका कांड जरूरी रन तो जोड़ो

गुरुवार, 7 अगस्त 2008

बेहतर है खुद सदर छोड़ दें फौरन गद्दी

जरदारी की बात पर सहमत हुए नवाज
दोनों पूरा करेंगे मिलकर कॉमन काज
मिलकर कॉमन काज मुशर्रफ बाहर जाएं
इसकी खातिर संसद में अभियोग चलाएं
दिव्यदृष्टि हो उनकी खूब फजीहत भद्दी
बेहतर है खुद सदर छोड़ दें फौरन गद्दी

चमके उनके नैन, मुलायम-लालू झूमें

जैसे ही आई खबर हटा सिमी से बैन
त्यों ही मारे खुशी के चमके उनके नैन
चमके उनके नैन , मुलायम - लालू झूमें
सेकुलर वोटों की ' गड्डी ' सपने में चूमें
दिव्यदृष्टि यूपी - बिहार में पाएं सत्ता
निर्दोषों का खून बहे बेशक अलबत्ता

मंगलवार, 5 अगस्त 2008

अमरनाथ की आस्था उगल रही है आग

जम्मू को जकड़े हुए सम्प्रदाय का नाग
अमरनाथ की आस्था उगल रही है आग
उगल रही है आग, जल रहा भाईचारा
फैले नित उन्माद लगे नफरत का नारा
दिव्यदृष्टि सरकार कारगर कदम उठाए
कश्मीरी घाटी वरना फिर से बंट जाए।

सोमवार, 4 अगस्त 2008

शर्मा, वीरू, हरभजन खूब लगाए जान

झंडा गाड़ा जीत का जबर गॉल मैदान
शर्मा , वीरू , हरभजन खूब लगाए जान
खूब लगाए जान , तानकर सीना घूमें
पीट-पीटकर लंका को मस्ती में झूमें
चला न कोई दिव्यदृष्टि सिंहल हथकंडा
जबर गॉल मैदान जीत का गाड़ा झंडा

शनिवार, 2 अगस्त 2008

संन्यासिन ने साफ दिखाई सूरत असली

बीजेपी को चली थी करने जो बदनाम
ओछी नीयत का दिया उसने खुद पैगाम
उसने खुद पैगाम बांटकर सीडी नकली
संन्यासिन ने साफ दिखाई सूरत असली
दिव्यदृष्टि बजने से पहले फटा नगाड़ा
दागदार छवि हुई खुल गया फर्जीवाड़ा

शुक्रवार, 1 अगस्त 2008

तिकड़ी फिर बेहाल, हाथ आई मायूसी

एक ओर वीरू जहां पीट रहे थे ' गॉल '
वहीं दूसरी ओर थी तिकड़ी फिर बेहाल
तिकड़ी फिर बेहाल , हाथ आई मायूसी
दर्शक हुए निराश बढ़ गई कानाफूसी
दिव्यदृष्टि लग चुका बैट पर जिनके ताला
विदा कीजिए उन्हें डाल कर सादर माला
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यह मैं हूं

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