शनिवार, 31 मई 2008

मगर न करिए भूलकर महंगाई का जिक्र

आम आदमी की बहुत मनमोहन को फिक्र
मगर न करिए भूल कर महंगाई का जिक्र
महंगाई का जिक्र, तनिक भी उन्हें न भाए
आसमान पर भले तेल की कीमत जाए
दिव्यदृष्टि मत पीट डियरनेस की तू डुग्गी
तज कर मोटर कार बैठ सरकारी बुग्गी

2 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

bahut sahi likha hai....

ye manhgaayee sirf bharat hi nahin--sabhi jagah apne panje faila rahi hai...

[kripya word verification hata lijeeye..ye comment likhne walon ko discourage karta hai..comments moderate kar lijeeyega...]

Sabhaar...

बाल किशन ने कहा…

सचमुच आपकी दृष्टि दिव्या है,
कमाल है.

यह मैं हूं

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