सोमवार, 10 अगस्त 2009

उन्हें बांग्लादेश तुरत वापस भिजवाए

जिन्हें समझ शरणार्थी दी थी कभी पनाह
अब उनके मन में उठी होम लैंड की चाह
होम लैंड की चाह, बढ़ा कर ताकत भारी
नए इलाके की करते शातिर तैयारी
दिव्यदृष्टि इसलिए न भारत देर लगाए
उन्हें बांग्लादेश तुरत वापस भिजवाए

2 टिप्‍पणियां:

P.N. Subramanian ने कहा…

नहीं भिजवाएंगे. हमें वोट चाहिए. यही हमारे वोटर हैं.

गिरिजेश राव ने कहा…

फूलों की मत पूछो
पूरा कूड़ेदान सजा कर रखा है।
इधर उधर कहाँ जाते हो?
कहाँ थूकोगे, कहाँ मूतोगे?
देखो, तुम्हारे बिगाड़ने को,
पूरा हिन्दुस्तान बना रक्खा है।
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यह शब्द पुष्टिकरण हटाएँ महोदय, निहायत ही बेकार सी उलझन है।

यह मैं हूं

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