बुधवार, 13 अगस्त 2008

मियां मुशर्रफ के रहे गिने-चुने दिन शेष

मियां मुशर्रफ के रहे गिने-चुने दिन शेष
फिर भी धारण कर रहे हमदर्दी का वेश
हमदर्दी का वेश , जली जनरल की रस्सी
गई न लेकिन ऐंठ बची कश्मीरी कस्सी
दिव्यदृदृष्टि जो बेमतलब ही टांग अड़ाए
वही दुष्ट बैठा घाटी पर आंख गड़ाए।

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