रविवार, 31 अगस्त 2008

जम्मू वाले तो हुए किसी तरह संतुष्ट

जम्मू वाले तो हुए किसी तरह संतुष्ट
महबूबा मुफ्ती मगर समझौते से रुष्ट
समझौते से रुष्ट , दिखाएं तेवर तीखे
उधर हुर्रियत के नेता घाटी में चीखे
दिव्यदृष्टि जो बोलें बंटवारे की बोली
अमन न कायम होने दे दुष्टों की टोली
हुई न धरती एक गज अमरनाथ के नाम
डेढ़ महीने तक रहा घाटी में कोहराम
घाटी में कोहराम , सैकड़ों जान गंवाए
एक इंच भी भूमि नहीं फिर भी ले पाए
दिव्यदृष्टि करते हैं जो नाहक नादानी
उन्हें न हासिल होता है चुल्लू भर पानी

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यह मैं हूं

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