मंगलवार, 26 अगस्त 2008

बाहर करो निकाल समझकर उनको रद्दी

जिसने ओलिंपिक पदक जीत बढ़ाई शान
करे उसी के पिता का पुलिस यहां अपमान
पुलिस यहां अपमान , मिट गई सारी गैरत
देख निकम्मपान उसका है सबको हैरत
दिव्यदृष्टि जिन दुष्टों ने की हरकत भद्दी
बाहर करो निकाल समझकर उनको रद्दी

3 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है।

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन...

राजीव ने कहा…

अद्भुत

यह मैं हूं

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