बुधवार, 30 सितंबर 2009

रिश्तेदारों को 'दलाल' मत बोलो मेरे भाई

दांत पीसते, बाल नोचते पेपर बगल दबाये
हुए क्रोध से लाल सुधारक जी मेरे घर आये
उषाकाल दरवाजे पर सुन हाहाकारी दस्तक
अनहोनी की आशंका से ठनका मेरा मस्तक
सहमे-सहमे जीर्णद्वार को ज्यों ही मैंने खोला
दाग दिये बेरहमी से बोफोर्स तोप का गोला
बोले जिसके कारण प्यारे हुई खूब रुसवाई
उसी केस को बंद कर रही काहे सीबीआई
टेढ़ा प्रश्न सुना तो खीझा उनके भोलेपन पर
लेकिन चोट लगी थी भारी मेरे गीले मन पर
दवित हृदय से मैंने उनको सीधी बात बताई
रिश्तेदारों को 'दलाल' मत बोलो मेरे भाई
दिव्यदृष्टि बहनोई के घर करता जो घोटाला
बिन सबूत के साफ बरी हो जाता है वो साला

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यह मैं हूं

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