शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

फिर भी चारा चोर रोज पा रहे प्रतिष्ठा

बड़बोलेपन से जमे राजनीति में धाक
सरेआम बेशक कटे मर्यादा की नाक
मर्यादा की नाक मिटे नैतिकता-निष्ठा
फिर भी चारा चोर रोज पा रहे प्रतिष्ठा
दिव्यदृष्टि गुंडई रही यदि यूं ही चालू
लोकतंत्र को लात रोज मारेंगे लालू

कोई टिप्पणी नहीं:

यह मैं हूं

यह मैं हूं

ब्लॉग आर्काइव